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जानिए पहले हुए रिजेक्ट, फिर मिले अरुण गोविल-सुनील लहरी को राम-लक्ष्मण के रोल

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Film प्रचार

-फिल्म प्रचार डेस्क

धारावाहिक रामायण के निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर सीरियल में राम के रोल के लिए जिन कलाकारों से मिल रहे थे, उनसे संतुष्ट नहीं थे। राम के रोल के ऑडिशन चल रहे थे और अरुण गोविल ने भी ऑडिशन दिया था। रामानंद सागर ने उन्हें ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिया। उस दौरान अरुण गोविल रामानंद सागर के सीरियल विक्रम और वेताल में राजा विक्रमादित्य का रोल कर रहे थे। सागर उन्हें विक्रमादित्य की तरह देख रहे थे। अतः अरुण गोविल में उन्हें अपने राम नहीं दिखे। उन्होंने अरुण से कहा कि आप कोई दूसरा रोल कर लीजिए। उन्होंने अरुण से भरत या लक्ष्मण के रोल में से कोई एक चुनने को कहा। परंतु अरुण गोविल अड़ गए कि अगर मैं राम के रोल के फिट नहीं हूं तो कोई बात नहीं, दूसरा रोल नहीं करूंगा। ऑडिशन चलते रहे और फिर अचानक एक दिन रामानंद सागर ने अरुण गोविल को राम बना दिया। अरुण गोविल कहते हैं, ‘मैं आज तक नहीं समझ पाया कि उनका माइंड कैसे चेंज हुआ था।’ राम के रोल में चुने जाने के बाद अरुण गोविल ने इस किरदार में उतरने के लिए न केवल बतौर कलाकार बहुत मेहनत की, बल्कि अपनी लाइफ स्टाइल तक बदल ली। सबसे खास बात कि उन्होंने सिगरेट पीना तक छोड़ दी और पूरी तरह राम के किरदार को जीना शुरू कर दिया।

वहीं रामायण में राम के छोटे भाई लक्ष्मण बने सुनील लहरी बताते हैं कि उनका चयन भी पहले लक्ष्मण के रोल के लिए नहीं हुआ था। रामानंद सागर ने उन्हें शत्रुघ्न का रोल दिया था। सुनील लहरी ने शत्रुघ्न के रोल में शूटिंग शुरू भी कर दी थी। मगर तभी पासा पलट गया। अरुण गोविल बताते हैं, ‘जिस ऐक्टर को सागर ने लक्ष्मण का रोल दिया, वह चार एपिसोड की शूटिंग करने के बाद सैट से भाग खड़े हुआ। उसे डर लगा कि सीरियल में लक्ष्मण का रोल करने से वह टाइपकास्ट हो जाएगा और उसका ऐक्टिंग करिअर खतरे में पड़ जाएगा।’ अरुण गोविल के अनुसार लक्ष्मण बने ऐक्टर के भाग जाने के बाद रामानंद सागर ने सुनील लहरी को लक्ष्मण की भूमिका दी। यही नहीं, जिन चार एपिसोड की शूटिंग लक्ष्मण बने दूसरे कलाकार के साथ हुई थी, उसके सारे दृश्य हटा कर नए सिरे से शूटिंग की गई।

सुनील लहरी कहते हैं कि अरुण गोविल और उनका राम-लक्ष्मण के किरदारों के रूप में चयन वास्तव में विधि का लिखा ही था। सुनील के अनुसार, हमें यह रोल हमारे स्वभाव के अनुरूप ही मिले। अरुण गोविल शुरू से शांत स्वभाव के हैं। कम बोलते हैं। किसी बात पर जल्दी रिएक्ट नहीं करते हैं। जबकि मेरा स्वभाव तेज और गुस्सैल रहा है। अरुण गोविल अपने स्वभाव के बारे में कहते हैं कि मैं तब तक किसी बात पर प्रतिक्रिया नहीं करता जब तक वह बात मेरे अंदर नहीं उतर जाती और मैं उसका विश्लेषण नहीं कर लेता।


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