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शॉर्ट फिल्म

मंटो ट्रिलॉजी की धूम, 1.25 लाख से ज्यादा दर्शकों ने देखी यूट्यूब पर

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Film प्रचार

– कुल 45 मिनट है तीन फिल्मों की अवधि

– अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में प्रदर्शन, अब देश में मिल रहा प्यार

भारत-पाक विभाजन की त्रासदी पर दर्दनाक कहानियां लिखने वाले हिंदी-उर्दू के साझे लेखक सआदत हसन मंटो पर बनी ट्रिलॉजी इन दिनों यूट्यूब पर धूम मचा रही है। मंटो के जीवन पर आधारित ‘मंटो की शादी’, ‘फ्रॉड मंटो’ और ‘पहलू जो मंटो ने छुआः समलिंगी प्यार’ शीर्षक से बनी तीन शॉर्ट फिल्में दर्शकों को खूब पसंद आ रही हैं और इन अब तक सवा लाख से ज्यादा दर्शक देख और पसंद कर चुके हैं। इस ट्रिलॉजी का निर्देशन श्रीवास नायडु ने किया है। प्रनति नायडु फिल्म्स बैनर तले श्रीवास नायडु और रवि बुले ने इस त्रयी का निर्माण किया है।

मंटो के जीवन पर यूं तो 2015 में पाकिस्तान में और 2018 में भारत में बायोपिक फिल्में बन चुकी हैं मगर इस शानदार लेखक के जीवन का फलक इतना विस्तृत है कि उसे कुछ मिनटों या घंटों में नहीं समेटा जा सकता। मंटो त्रयी मंटो के जीवन और उनके रचना संसार की तीन अलग-अलग खिड़कियां दर्शकों के सामने खोलती हैं, जिन पर पूर्व में बनी फिल्मों में रोशनी नहीं डाली गई है। तीनों शॉर्ट फिल्में 20 से अधिक विदेशी और देसी फिल्म महोत्सवों में दिखाई और सराही जा चुकी है।

मंटो त्रयी की तीसरी फिल्म ‘पहलू जो मंटो ने छुआः समलिंगी प्यार’ को हाल में होली के अवसर पर यूट्यूब पर रिलीज किया गया। इससे पहले दिसंबर 2019 में ‘फ्रॉड मंटो’ और नवंबर 2019 में ‘मंटो की शादी’ रिलीज की गई थी। इन तीनों फिल्मों की कुल अवधि करीब 45 मिनिट है। तीनों फिल्में यूट्यूब चैनल क्रिएटिव कर्मा पर उलब्ध हैं। मंटो त्रयी में श्रीवास नायडु मंटो की भूमिका में खूब पसंद किए जा रहे हैं। मंटो के जीवन पर उपलब्ध सामग्री तथा उनके आत्मकथात्मक आलेखों पर आधारित इन फिल्मों की पटकथाएं रवि बुले ने लिखी हैं। बीते दो वर्षों से ये फिल्में भारत समेत यूरोप, अमेरिका और एशिया के विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में धूम मचा रही थीं। इस समय भी इनका चयन कई फिल्म महोत्सवों में हो रखा है, जहां ये आने वाले दिनों में दिखाई जाएंगी।

मंटो त्रयी की पहली फिल्म ‘मंटो की शादी’ जहां इस लेखक के निकाह के किस्से को बेहद रोचक अंदाज में बयान करती है, वहीं ‘फ्रॉड मंटो’ में खुद मंटो बताते हैं कि वह अपने अंदर छुपे लेखक और शख्स को किस नजरिये से देखते हैं। फ्रॉड मंटो में श्रीवास नायडु डबल रोल में हैं। वहीं तीसरी फिल्म ‘पहलू जो मंटो ने छुआः समलिंगी प्यार’ समलैंगिकता के मुद्दे पर मंटो के विचारों को हमारे सामने रखती है। इन दिनों समाज में समलैंगित को लेकर जबर्दस्त विमर्श चल रहा है। स्त्री-पुरुष संबंधों की बेबाक कहानियां लिखने वाले मंटो पर समाज में अश्लीलता परोसने के आरोप लगे और कोर्ट केस भी चले मगर उन्होंने स्त्री या पुरुष समलैंगिकता मुद्दे पर प्रत्यक्ष रूप से कोई कहानी नहीं लिखी, जैसी कि उनकी समकालीन और मित्र लेखिका इस्मत चुगताई ने ‘लिहाफ’ लिखी थी। ऐसे में ‘पहलू जो मंटो ने छुआः समलिंगी प्यार’ रोचक ढंग से यह बताती है कि समलैंगिकता को लेकर इस महान लेखक की सोच क्या थी।

पहलू जो मंटो ने छुआः समलिंगी प्यार

मंटो की शादी


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