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रिव्यू / वेब सीरीज / हंसमुख**

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थोड़े और पकौड़े तलते तो अच्छा रहता

फिल्म, सीरियल या वेब सीरीज देखने के लिए दर्शकों का मूड कैसे बनता है, इसका तो पता नहीं परंतु नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज हंसमुख देख कर यह जरूर पता चलता है कि इसे बनाने वालों का मूड कैसे-कैसे बना होगा। कलाकार मूड से काम करते हैं और इस मूड को कहते है फील…। हंसमुख (वीर दास) का मैनेजर जिमी (रणवीर शौरी) उसे समझाता है कि हर कलाकार को एक्साइट करने वाला एक न एक ‘वायग्रा’ होता है। किसी कलाकार को फील मिलता है दारू से। किसी को मुर्गा-मटन से। सचिन तेंदुलकर को फील मिलता था जब वह बायां पैड पहले बांध कर मैदान में उतरता था। शाहरुख दोनों बांहें फैलाने की ऐक्टिंग से पहले 50 सिगरेटें फूंकता है। न्यूटन ने ग्रेविटी ढूंढने से पहले सेब खाया था। मियां तानसेन राग गाने से पहले बर्फ पर लेट जाता था… हंसमुख (वीर दास) का गुरु गुलाटी (मनोज पाहवा) स्टैंड-अप कॉमेडी शो से पहले पकौड़े खाता था। सोचिए कि पूरी जिंदगी पकौड़े खाने वाले गुरु गुलाटी की वजह से कितनों को रोजगार मिला होगा।

हंसमुख को देख कर खयाल आता है कि इसे लिखने-बनाने वालों ने कितने पकौड़े तले और खाए होंगे। अगर वाकई उन्हें पकौड़ों से ही फील मिलता था तो तय है कि फील में कमी रह गई। अभी और पकौड़े तले जाने की जरूरत थी क्योंकि हंसमुख की सबसे बड़ी समस्या इसकी राइटिंग है। इक्का-दुक्का आइडियों को ही राइटर कढ़ाही में छानते रह गए। नए-नए पकौड़े तलने लायक आइडियों का माल उन्हें कम पड़ गया। पहले ही एपिसोड में जब आपको पता चल जाता है कि स्टेज पर नर्वस हो जाने वाला हंसमुख परफॉरमेंस से पहले किसी का मर्डर करके ही फॉर्म में आकर चुटकुले सुना पाता है तो फिर सवाल उठता है कि वह आगे क्या कुछ गुल खिलाएगा। सच मानिए कि वह मर्डर करने के अलावा वह कुछ नहीं करता। रोमांस का मौका मिलने पर ढंग से रोमांस भी नहीं कर पाता। सिर्फ एक के बाद एक मर्डर करता है। हर परफॉरमेंस से पहले। मर्डर के बाद लाश ठिकाने का काम जिमी के जिम्मे है।

मर्डर होते हैं तो पुलिस आती है। पुलिस में रिटायर होने के करीब एक सीनियर इंस्पेक्टर है, वह बिना तहकीकात के ही हर केस क्लोज करता जाता है क्योंकि उसे अपनी पेंशन की टेंशन है। वह लगातार यही रट लगाए रहता है। एक ट्रेक टीवी के लिए स्टैंडअप कॉमेडी शो कॉमेडी बादशाहो बनाने वाली कंपनी के मालिक (रवि किशन) और टेलेंज मैनेजमेंट करने वाली प्रोमिला (अमृता बागची) का है। कहानी के लिहाज से यह सबसे रोचक ट्रेक है और दर्शकों को बांधता है। इसके किरदारों की जिंदगी में परतें नजरें आती हैं। रीयलिटी शोज में कैसे काम होता है और इससे जुड़े लोगों की हकीकत क्या होती है, इस ट्रेक में खूबसूरती से उजागर किया गया है।

हंसमुख की सबसे कमजोर कड़ी है, इसके चुटकुले। जो इक्का-दुक्का मौकों को छोड़ कर कतई नहीं गुदगुदाते है। कई जगह तो वह फूहड़ भी हो गए हैं। वास्तव में चुटकुलों के पकौड़े यहां कच्चे रह गए। जबकि यही शो में स्वाद इन्हीं से पैदा होना था। वीर दास खुद स्टैंडअप कॉमेडियन हैं लेकिन उत्तर भारतीय हंसमुख की भूमिका में नहीं जमते। शो में मुंबई से लगातार शिकायत करने के बावजूद उनके चेहरे पर महानगरीय अंदाज बरकरार रहता है। जबकि शो लूट ले जाते हैं रणवीर शौरी। जिमीः द मेकर के रोल में वह बेहतरीन हैं। उनका अभिनय और संवाद अदायगी आला दर्जे की है। वह किरदार में उतरते हैं। अमृता बागची भी प्रभावित करती हैं। रवि किशन हमेशा की तरह दिए गए रोल को साध लेते हैं। वेब सीरीज को खूबसूरती से कैमरे में कैद किया गया है और संपादन भी अच्छा है। मगर स्टोरी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग का डिपार्टमेंट कमजोर पड़ गया। जिनकी जिम्मेदारी खुद वीर दास के साथ निखिल गोंजालविस, सुपर्ण वर्मा, अमोघ रणदिवे और नीरज पांडे ने संभाली थी।

हंसमुख का ट्रेलर देखने के लिए लिंक क्लिक करें

प्लेटफॉर्मः नेटफ्लिस्क
जॉनरः क्राइम
अवधिः 10 एपिसोड
निर्देशकः निखिल गोंजालविस
सितारेः वीर दास, रणवीर शौरी
रेटिंग **


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