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13 Tribute of love*** Review : एक फिल्म डायेक्टर की इस तेरहवीं में आप सादर आमंत्रित हैं

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Film प्रचार

फिल्म प्रचार डेस्क

मायानगरी मुंबई का कैनवास हर किसी के लिए सतरंगी नहीं हो सकता। उसके दो और गहरे रंग भी हैं, जिन्हें अंधेरे और उजाले के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। मेहनत और भाग्य अगर साथ दे जाएं तो कलाकार ताउम्र उजाले में अपनी तरक्की के रंग बिखेरता जाता है, वरना अंधेरे की काली स्याही में पूरी उम्र सिर्फ लकीरें खींचने में कट जाती है। फिल्म 13 ट्रिब्यूट ऑफ लव रुपहले पर्दे की इसी सच्चाई को 1 घंटे 5 मिनट की कहानी में बयां कर देती है। ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर आई इस फिल्म की शुरुआत मुंबई में खुदकुशी कर चुके हैं एक निर्देशक के यूपी के पैतृक गांव में अंतिम संस्कार के उलझे-अनछुए ताने-बाने के साथ होती है। एक व्यक्ति जिसने उस कला में पारंगत साबित करने के लिए खुद की आहुति दे दी, उसे ही उसका समाज कोई तवज्जो नहीं देता। मगर इससे उलट उसका परिवार और मासूम बेटी भी पिता के जुनून को सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए उसकी तेरहवीं तक उनकी बनाई अधूरी फिल्म रोज देखते हैं।

फिल्म बताती है कि यह सिर्फ एक निर्देशक की खुदकुशी नहीं, बल्कि समाज के ऐसे तबके की अनदेखी थी, जहां से आने पर न सिर्फ लोगों को निम्न-दोयम दर्जे का माना गया बल्कि उनकी काबिलियत की बार-बार अनदेखी की गई। इसका नतीजा यह रहा कि वह अपनी फिल्म ‘अमेरिका कहां गया’ 70 फीसदी ही बना कर अपनी जिंदगी खत्म कर लेता है। उसकी कहानी दुनिया तक लाने के लिए एक टीवी पत्रकार भी तेरहवीं तक परिवार और गांव वालों के बीच रहकर इस अलहदा अंदाज को समझने की कोशिश करती है।

पूरी तरह ब्लैक एंड व्हाइट कैनवास पर शूट फिल्म पिता को मुखाग्नि देने वाली नन्हीं बच्ची, विधवा बीवी और भाई के सपनों को जिंदा रखने वाले भाई पर केंद्रित है। फिल्म का रोचक रंगीन और मनोरंजक अंश वह अधूरी फिल्म है, जिसे निर्देशक कभी पूरा नहीं कर पाया। प्लॉट के तौर पर फिल्म ग्रामीण परिवेश की संवेदनाओं का वास्तविक चित्रण करती है और यही बात इसे दर्शकों से बांधती है। फिल्म में हिंदी के साथ अवधी, पूर्वांचल का पुट लिए भाषा इस्तेमाल की गई है। निर्देशक राहुल तिवारी ने 13 ट्रिब्यूट ऑफ लव में बतौर कलाकार हाल में वेबसीरीज आश्रम में नजर आए जहांगीर खान, दीपक देव मिश्रा, इकबाल तौकीर, शगुन तिवारी, निकिता दीक्षित की प्रतिभा का अच्छा इस्तेमाल किया है। निर्देशक की अधूरी फिल्म अमेरिका कहां गया में पीपली लाइव फिल्म ओमकार दास मानिकपुरी अपनी साली के साथ प्रेमपाश में फंसे दिखते हुए गुदगुदाते हैं। समाज के नजरिए को बदलने का संदेश देती है यह फिल्म ग्रामीण इलाकों में आज भी मौजूदा अज्ञानता और उससे लड़ते जागरूक युवाओं को एक सीख देती है।

निर्देशक : राहुल तिवारी

कलाकार : जहांगीर खान, ओमकार दास मानिकपुरी, दीपक देव मिश्रा, इकबाल तौकीर, शगुन तिवारी, निकिता दीक्षित

अवधि : 1:05 घंटे

रेटिंग ***


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