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2020 की सबसे खराब फिल्मों में होगी गिनती

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फिल्म समीक्षा/मिसेज सीरियल किलर*

नेटफ्लिक्स को भारत में जड़ें मजबूत करनी है तो कमजोर और घटिया कंटेंट से दूर रहना होगा। नाम बड़े और दर्शन छोटे टाइप निर्माता-निर्देशकों को पहचानना होगा। इस साल नेटफ्लिक्स की घोस्ट स्टोरीज, गिल्टी और मस्का जैसी खराब फिल्में पहले ही दर्शक रिजेक्ट कर चुके हैं। मिसेज सीरियल किलर खराब फिल्मों से भी चार कदम आगे है। शिरीष कुंदेर जैसे सुपरफ्लाप राइटर-डायरेक्टर की यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर बेहतरीन फिल्में पेश करने वालों को शर्मिंदा कर देगी। कि ऐसा व्यक्ति उनके साथ नेटफ्लिक्स के प्लेटफॉर्म पर आकर कतार में खड़ा हो गया। भले ही मई का महीना ही शुरू हुआ है मगर यह तय है कि मिसेज सीरियल किलर की गिनती 2020 की सबसे खराब फिल्मों में होगी। यूं इस बात से शिरीष कुंदेर को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि पहले भी वह ऐसी घटिया फिल्में बना चुके हैं।

मिसेज सीरियल किलर, थ्रिलर के नाम पर दो कौड़ी का कंटेट है। एक शहर में सीरियल किलर बिन ब्याही प्रेग्नेंट लड़कियों की हत्या कर रहा है। पुलिस (मोहित रैना) ने एक गायनिकोलॉजिस्ट (मनोज बाजपेयी) को गिरफ्तार किया है क्योंकि लड़कियों की लाशें उसकी पुरानी प्रॉपर्टी के आहते में मिली हैं। कोर्ट गायनिक को जमानत नहीं देती। वकील ने गायनिक की मिसेज (जैकलीन फर्नांडिस) को समझाया है, अगर कुछ ऐसा हो कि उसके पति के जेल में रहते हुए भी कोई बिन ब्याही प्रेग्नेंट लड़की गायब हो या उसकी हत्या हो तो गायनिक को जमानत मिल जाएगी। मिसेज एक लड़की को उठा लेती है और फिर पुलिस को नई लाश मिलती है। गायनिक जमानत पर छूट जाता है। अब सवाल यह कि सीरियल किलर कौन हैॽ

शिरिष कुंदेर ने फिल्म कहानी भी खुद लिखी है और यहां-वहां से ऐसे-ऐसे तार जोड़े हैं कि आपको थ्रिलर में हंसी छूटने लगती है। निर्देशक ने थ्रिलर कहानी में रोमांस का तड़का लगाने में कसर बाकी नहीं रखी और बताया कि केस की जांच कर रहा पुलिसवाला गायनिक की पत्नी का पुराना आशिक है। इन बेसिर पैर की बातों के साथ फिल्म आपको जैकलीन फर्नांडिस की उबाऊ ऐक्टिंग और मनोज बाजपेयी की ओवर ऐक्टिंग से भी हंसाती हैं। सलमान खान की मेहरबानी से चल रहा जैकलीन का बॉलीवुड करिअर अब लगभग डूब चुका है। मिसेज सीरियल किलर उसे निचले तल मे पहुंचा देगी। मनोज बाजपेयी अच्छे ऐक्टर हैं परंतु उनकी समस्या यह है कि वह फिल्म या तो दोस्ती खाते में करते हैं या कहानी में सिर्फ अपना किरदार देख कर। ऐसा किरदार, जिसमें उनके ऐक्टर को आत्मिक संतोष मिले। वह स्वांतः सुखाय की राह चलते हुए कब ऐक्टिंग से ओवर ऐक्टिंग करने लगते हैं, उन्हें ही पता नहीं चलता। वह संभवतः भूल चुके हैं कि फिल्म निजी परफॉरमेंस के साथ टीम वर्क भी है। सिनेमा डिजिटल के साथ नए दौर में प्रवेश कर चुका है और मनोज बाजपेयी का नए सिरे से काम के चयन के बारे में सोचना चाहिए। सुपर सितारे आमिर खान की भतीजी और चर्चित निर्माता-निर्देशक मंसूर खान की बेटी जायन मारी खान ने इस फिल्म से पर्दे के अभिनय की दुनिया में कदम रखा है। वह उस लड़की की भूमिका में हैं, जिसे गायनिक की पत्नी उठाती है। जायन का रोल बहुत कमजोर है। वह प्रभाव नहीं छोड़ पातीं।

कई बार छोटे पर्दे की पुलिस फाइल्स टाइप कहानियां मिसेज सीरियल किलर से बेहतर ढंग से लिखी होती हैं। शिरीष कुंदेर खराब लेखक-निर्देशक हैं, यह बात फिर से साबित होती है। बीते वर्षों में उन्होंने अपने पुराने काम को लेकर कोई चिंतन किया, कुछ नया सीखने की कोशिश की ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। इस पौने दो घंटे की फिल्म में ऐसा कुछ नहीं जो आकर्षित करे। ऐसे दौर में जबकि लॉकडाउन की वजह से आप घर में फुर्सत में बैठे हैं, तब भी मिसेज सीरियल किलर देख कर महसूस होता है कि वक्त बर्बाद हुआ।

 

प्लेटफॉर्मः नेटफ्लिक्स
निर्माताः फराह खान-शिरीष कुंदेर
निर्देशकः शिरीष कुंदेर
अवधिः एक घंटा 47 मिनिट
सितारेः मनोज बाजपेयी, जैकलीन फर्नांडिस, मोहित रैना, जायन मारी खान       
रेटिंग *

 


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