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Kaali Khuhi*1/2 Review: नेटफ्लिक्स के दर्शकों लिए बुरे सपने जैसी फिल्म

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Film प्रचार

फिल्म प्रचार डेस्क

काली खुही यानी काला कुआं। काली मतलब मौत। पंजाब के एक अनजाने गांव में मौजूद इस मौत के कुएं के ईद-गिर्द सतही कहानी पर रची गई यह फिल्म बॉलीवुड की खराब हॉरर फिल्मों से भी आगे नहीं निकल पाती। पुराने वक्त में बेटे की चाह में बेटियों को जन्म के समय ही मार देने की कुरीति पर आधारित प्लॉट एक बच्ची के कंधे पर ही ढोया गया है। कई पीढ़ियों से नवजात बेटियों की लाशों से पटे-ढंके एक कुएं के खुलते ही गांव में टूटने वाले कहर के कुछ दृश्य चौंकाते जरूर हैं, लेकिन वास्तविक भय का माहौल रचने में नाकाम रहते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज करीब डेढ़ घंटे की यह फिल्म नेटफ्लिक्स के कोर वीवर्स के लिए बुरे सपने जैसी है। यह नेटफ्लिक्स पर इससे पहले अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन हाउस की सुपरनेचुरल-हॉरर बुलबुल से भी कमजोर है।

फिल्म की कहानी गांव में खुले कुएं से निकलने वाली एक बच्ची (साक्षी) की रूह के साथ आगे बढ़ती है, जो उसे मारने वाले परिवार के लोगों के लिए काल बन जाती है। इसी घर में आई 10 साल की बच्ची शिवांगी (रीवा अरोड़ा) के जरिए उसे अंतत: मुक्ति मिलती है, तब तक दर्शक को भयाक्रांत करने की कोशिश कराती फिल्म खुद को खींचती हुई लगती है। यहां फिल्म की कहानी पर जरूर सवाल हैं, लेकिन पटकथा के लिहाज से इसमें पैनापन कायम है। डीटेलिंग में भारतीय समाज दर्शन और धार्मिक संस्कारों के शोध की कमी अखरती है। काली खुही में सत्या मौसी के किरदार में नजर आईं शबाना आजमी का भी पूरा इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। इसमें दिखाया गया है कि सत्या मौसी के पास एक किताब है, जिसमें गांव में पैदा हुई उन लड़कियों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें पैदा होते ही मार दिया गया। कहानी और किरदारों के स्तर पर यहां कई बातें हैं जो फिल्म में साफ नहीं होतीं। फिल्म की निर्देशिका टैरी समुंदरा भारत में पैदा जरूर हुईं लेकिन अमेरिका में रहती हैं और उनके को-राइटर भी अमेरिकी हैं। इसका असर फिल्म पर साफ नजर आता है। वैसे भी बतौर निर्देश टैरी की यह पहली फुललेंथ फिल्म है, जिसमें होमवर्क की कमी दिखती है। इससे पहले उन्होंने कई सफल शॉर्ट फिल्में बनाई हैं। काली खुही मौजूदा समय में दूसरे ओटीटी प्लेटफार्मों पर मौजूद दूसरी हॉरर फिल्मों के मुकाबले कमजोर होने से दर्शकों को आकर्षित कर पाएगी, कहना मुश्किल है।

निर्देशक: टैरी समुंदरा

कलाकार: शबाना आजमी, लीला सैमसन, संजीदा शेख, सत्यदीप मिश्रा, रीवा अरोड़ा, हेतवी भानुशाली, रोज राठौड़

अवधि : करीब डेढ़ घंटे

ओटीटी : नेटफ्लिक्स

रेटिंग *1/2


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