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अवार्ड के लिए कैसे गिड़गिड़ाते, नखरे दिखाते, धमकाते हैं सितारे, यहां पढ़िए

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Film प्रचार

फिल्म प्रचार डेस्क

हर साल होने वाले फिल्मी अवार्ड समारोह ईमानदार नहीं होते, यह बात तो आम हो चुकी है। परंतु अब यह भी मीडिया में आ गया है कि अवार्ड पाने के लिए फिल्मी सितारे कैसे मुंह फुलाते, गिड़गिड़ाते तो धमकाते हैं। कई बार वह पैसे लेने के बाद भी अवार्ड देने वालों को नखरे दिखाते हैं। एक समय इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ रहे शेखर गुप्ता ने वेबसाइट द प्रिंट में अपने एक लेख में स्क्रीन अवार्ड समारोहों के अनुभव लिख कर सितारों की पोल खोल दी है। उन्होंने खुल कर लिखा है कि फिल्मी सितारे अवार्ड को लेकर कितने लालची होते हैं और इसे अपने अहंकार का मामला बना लेते हैं। जानते हैं, उन्होंने अपने लेख में क्या-क्या बातें कही…

नाराज हो गए करन जौहर

करन जौहर को जब पता चला कि उनकी फिल्म माई नेम इज खान को 2011 के स्क्रीन अवार्ड्स में जूरी ने नामांकित नहीं किया तो वह झल्ला पड़े। भले ही यह उस साल की बड़ी हिट फिल्म थी परंतु जूरी को वह अवार्ड देने योग्य नहीं लगी। अमोल पालेकर उस साल जूरी का हिस्सा थे। उनके और शेखर गुप्ता के पास इस मुद्दे को लेकर कई फोन गए, जिसमें गुस्सा और नाराजगी थी।

बायकॉट की धमकियां

गुप्ता के अनुसार माई नेम इज खान को नामांकित नहीं किया गया तो उन्हें और उनकी टीम को धमकियां मिलने लगी कि फिल्म के सितारे ही नहीं बल्कि पूरा बॉलीवुड अवार्ड का बायकॉट करेगा। स्क्रीन ने शाहरुख खान के साथ स्टेज परफॉरमेंस और प्रेजेंटेशन का अनुबंध किया था। गुप्ता के अनुसार धमकियां या फोन कभी शाहरुख की तरफ से नहीं आए परंतु करन जौहर ने उन्हें फोन करके रोना रोया था कि उनकी फिल्म क्यों नामांकित नहीं की गई। खैर, जिस चैनल के साथ स्क्रीन का अनुबंध था, बाद में उसने एक ऑनलाइन पोल कराया और उसके आधार पर पॉपुलर श्रेणी में माई नेम इज खान को बेस्ट फिल्म अवार्ड दिया गया। गुप्ता ने यह भी लिखा है कि 2004 में पूरे बच्चन परिवार ने अपनी ताकत दिखाते हुए अवार्ड का बायकॉट किया था परंतु कमजोर याददाश्त की वजह से इसका कारण भूल गए हैं।

ऋतिक बोले पापा को अवार्ड क्यों नहीं

2007 की एक घटना के बारे में गुप्ता ने लिखा कि ऋतिक रोशन को स्क्रीन के बेस्ट ऐक्टर अवार्ड (फिल्मः कृष) के लिए चुना गया था। उनसे यह भी बात थी कि वह स्टेज पर परफॉरमेंस देंगे। सब ठीक चल रहा था कि समारोह के एक घंटे पहले ऋतिक ने आयोजकों से कहा कि वह परफॉमेंस तो देंगे परंतु बेस्ट ऐक्टर का अवार्ड नहीं लेंगे। वजह यह कि जो जूरी उनके डायरेक्टर पिता के काम को सबसे बढ़िया नहीं समझ सकती तो वह यह कैसे तय कर सकती है कि बेस्ट ऐक्टर कौन है। खैर, काफी मनाने के बाद ऋतिक बेस्ट ऐक्टर अवार्ड लेने को तैयार हुए। मगर तब भी उनकी नाराजी खत्म नहीं हुई और उन्होंने आयोजकों की तरफ से अवार्ड के बाद रखी गई पार्टी का बायकॉट किया।

अवार्ड के लिए रोने लगीं कैटरीना

शेखर गुप्ता ने 2010 के स्क्रीन अवार्ड की घटना लिखी है। जिसके मुताबिक कैटरीना को स्क्रीन ने परफॉमेंस के लिए अनुबंधित करके एडवांस में पूरे पैसे दे दिए गए थे। परफॉरमेंस के कुछ मिनट पहले कैटरीना अपनी वैनिटी वैन में नखरे दिखाने लगीं और परफॉरमेंस में आना-कानी करने लगीं। गुप्ता को उन्हें मनाने के लिए खुद जाना पड़ा। कैटरीना अचानक उन पर बरस पड़ी कि क्यों लोग उन्हें बुलाते हैं जब अवार्ड नहीं देना होता। वह रोने लगीं और उनका मेक-अप खराब हो गया। काफी समझाने बुझाने पर वह परफॉरमेंस के लिए मानीं और वह भी इस शर्त पर कि स्क्रीन ने तत्काल एक नई कैटेगरी बनाई, पॉपुलर चॉइस अवार्ड। यह अवार्ड कैटरीना को स्टेज पर दिया गया।

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा ने किया बायकॉट

मामला 2012 के स्क्रीन अवार्ड का है। जूरी ने बेस्ट फिल्म का अवार्ड जोया अख्तर की जिंदगी ना मिलेगी दोबारा और मिलन लुथरिया की डर्टी पिक्चर को मिलकर देने का फैसला किया। जोया को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने पूरी टीम के साथ मिलकर अवार्ड का बायकॉट कर दिया। न तो निर्देशक समारोह में आई और न ही फिल्म के कलाकार। जावेद अख्तर को गुप्ता ने फोन किया तो फरहान अख्तर (विरोधस्वरूप) काली टीशर्ट पहने कुछ मिनट के लिए आए और कहा कि आपका सम्मान रखने आया हूं परंतु अवार्ड नहीं लूंगा। कुछ मिनट बाद वह चले गए। मंच से अवार्ड की घोषणा हुई तो जिंदगी ना मिलेगी दोबारा की टीम का एक भी सदस्य वहां नहीं था। फिल्म के वर्ल्डवाइड अधिकार रखने वाली कंपनी इरोज की कृषिका लुल्ला वहां थीं। शेखर गुप्ता के अनुरोध पर भी वह अवार्ड लेने मंच पर नहीं गई। अंततः उनके एक स्टाफ मेंबर को बुलाकर यह अवार्ड सौंपा गया।


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