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बॉलीवुड

दादा साहब फालके पुरस्कार की रकम से यश चोपड़ा ने किया अनोखा पुण्य

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Film प्रचार

फिल्म प्रचार डेस्क

बॉलीवुड में रोमांस के किंग कहे जाने वाले निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा को यूं तो जीवन में ढेर पुरस्कार मिले परंतु जिस पुरस्कार ने उन्हें सबसे ज्यादा संतोष दिया, वह था दादा साहेब फालके अवार्ड। यूं तो दादा साहब फालके का नाम जोड़ कर इधर मुंबई में बीते कुछ वर्षों में कई पुस्कार रेवडियों की तरह बंटते हैं परंतु असली ‘दादा साहेब फालके अवार्ड’ भारत सरकार की तरफ से फिल्मों में विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाने वाला यह सर्वोच्च पुरस्कार है। वर्ष 2001 के लिए नई दिल्ली में यश चोपड़ा को यह पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों मिला था। 13 फरवरी 2003 को विज्ञान भवन में उन्हें यह सम्मान दिया गया था. यश चोपड़ा बेहद खुश थे लेकिन पुरस्कार लेने के बाद उन्हें एक चिंता सताने लगी। चिंता यह कि पुरस्कार में मिली दो लाख रुपये की रकम का क्या करेंॽ फिल्मों से उन्होंने पर्याप्त धन कमाया था मगर सर्वोच्च पुरस्कार के रूप में मिली इस राशि को किस सही काम में लगाएंॽ

मुंबई पहुंचने के बाद यश ने काफी सोच विचार किया और अपने फिल्म पत्रकार दोस्त अली पीटर जॉन को फोन लगाया। उन्होंने जॉन को अपने विकास पार्क स्थित दफ्तर में बुलाया और परेशानी बताई। उन्होंने जॉन से पूछा कि इस विशिष्ट अवार्ड के दो लाख रुपये से ऐसा क्या महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है, जो इस राशि को सार्थक बना दे। वह काफी सोच-विचार कर चुके हैं परंतु कोई सही जवाब उन्हें सूझ नहीं रहा है। तब जॉन ने उनसे कहा कि सबसे बेहतर यह हो सकता है भारत में सिनेमा के जनक कहलाने वाले जिन दादा साहेब फालके के नाम पर यह पुरस्कार उन्हें मिला है, उनकी कैंसर से लड़ रही एकमात्र बेटी वृंदा पुसलकर को यह रकम दे दी जाए। वृंदा और उनका परिवार धनाभाव से जूझ रहा है और इस रकम से उन्हें कैंसर के इलाज में बहुत मदद मिलेगी। यह सुन कर यश चोपड़ा भावुक गए। उन्होंने जॉन से कहा कि क्या वह वृंदा के परिवार के किसी सदस्य को उनके दफ्तर में अगले दिन बुला सकते हैं। तब जॉन ने वृंदा पुसलकर के बेटे को ढूंढा और अगले दिन यश चोपड़ा के दफ्तर में बुला दिया। हालांकि उन्हें यह नहीं बताया गया कि यश चोपड़ा ने क्यों बुलाया है।

यश चोपड़ा के स्टाफ ने उनकी पूरी आवभगत की और सम्मान से बैठाया। वृंदा के बेटे उस समय भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए जब यश चोपड़ा ने उन्हें दो लाख रुपये का चैक भेंट करते हुए कहा कि यह रकम उन्हें दादा साहब फालके अवार्ड के रूप में मिली है और वह चाहते हैं कि इसे वृंदा के इलाज के खर्च में लगाया जाए। ऐसा ही हुआ और दादा साहब फालके की बेटी के परिवार को इस रकम से वृंदा पुसलकर के इलाज में बहुत मदद मिली। यश चोपड़ा ने भी पुरस्कार की रकम दादा साहब फालके की बेटी तक पहुंचा कर बहुत सुकून महसूस किया। हालांकि कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद वृंदा पुसलकर का निधन हो गया।


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